मुंबई, महाराष्ट्र | अक्टूबर 2025 — मुंबई पुलिस ने एक बड़े साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटाले का खुलासा हुआ है। इस घोटाले में अब तक ₹58 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की जा चुकी है। पुलिस ने इस मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार किया है जो विदेशी नेटवर्क से जुड़े बताए जा रहे हैं।
क्या है ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम?
‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटाला एक नई तरह की ऑनलाइन ठगी है जिसमें साइबर अपराधी खुद को पुलिस अधिकारी, सरकारी एजेंसी या बैंक अधिकारी बताकर लोगों को कॉल करते हैं।
वे झूठे आरोप लगाकर पीड़ित को डराते हैं — जैसे कि उसके नाम पर कोई अवैध ट्रांजैक्शन या ड्रग केस दर्ज है — और फिर उसे “जांच” के नाम पर एक वीडियो कॉल पर बंधक बना लेते हैं।
इस दौरान वे पीड़ित से कहते हैं कि वह किसी से संपर्क न करे और सभी बैंक डिटेल्स व OTP साझा करे।
मुंबई पुलिस की कार्रवाई
मुंबई साइबर पुलिस को कुछ महीनों से इस तरह की शिकायतें मिल रही थीं। जांच में पता चला कि ठग चीन, थाईलैंड और दुबई से संचालित हो रहे कॉल सेंटर्स से काम कर रहे थे।
गिरफ्तार किए गए 6 आरोपी भारत में मनी ट्रांसफर और फेक अकाउंट्स के ज़रिए यह रकम विदेशी खातों में भेजते थे।
पुलिस ने आरोपियों के पास से कई मोबाइल, लैपटॉप, फर्जी सिम कार्ड, और बैंक पासबुक्स बरामद की हैं।
ठगी का तरीका
- आरोपी पीड़ित को कॉल कर खुद को सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताते।
- पीड़ित पर मनी लॉन्ड्रिंग या अवैध पार्सल भेजने का आरोप लगाते।
- फिर डराकर वीडियो कॉल पर “हाउस अरेस्ट” कर देते।
- ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और बैंक डिटेल्स लेकर पूरे खाते से रकम निकाल लेते।
पुलिस की अपील
मुंबई पुलिस ने जनता से अपील की है कि –
- किसी भी अज्ञात व्यक्ति या एजेंसी को पर्सनल या बैंक जानकारी न दें।
- कोई भी कॉल या ईमेल यदि सरकारी एजेंसी के नाम से आए तो उसकी पुष्टि करें।
- किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत cybercrime.gov.in या 1930 हेल्पलाइन पर रिपोर्ट करें।
भारत में बढ़ रहा साइबर फ्रॉड
बीते कुछ महीनों में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे घोटाले तेजी से बढ़े हैं। NCRB के आंकड़ों के अनुसार, देश में हर साल हजारों लोग साइबर ठगी के शिकार हो रहे हैं।
सरकार और पुलिस विभाग लगातार लोगों को जागरूक करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि कोई भी ऐसे फ्रॉड में फंस न जाए।






